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Raj Kumar

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शिक्षक अपमान दिवस

Posted On: 6 Sep, 2012 Others में

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शिक्षक दिवस के अवसर पर, शिक्षकों का इसे अपमान दिवस के रूप में मनाना, हमारे लिए घोर शर्म की बात है । आज अपने देश में, हर उत्पाद के मूल्य में, एक गुणात्मक वृद्धि की जा रही है, नियोजित नर्स और डॉक्टरोँ को झोली भर-भर कर रुपया दी जा रही है तो फिर शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों ? क्या शिक्षक केवल राष्ट्र निर्माता कहलाने के लिए रह गया है ? जरा सोच कर देखिए! जो शोषित हैं, जो पीड़ित हैं वे कैसा राष्ट्र का निर्माण करेंगे ?



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

DR. PITAMBER THAKWANI के द्वारा
September 6, 2012

माननीय राज कुमार जी,आपकी पोस्ट ने निराश किया .शिक्षक दिवस पर अपमान की बात केवल आपने ही की है,कैसे हो रहा है उनका अपमान? मै एक शिक्षक रहा हूँ ,शिक्षको को मुझसे अधिक और कौन जान सकता है? इनके कारनामो से कौन नहीं है अवगत? यदि आपके हिसाब से इनका अपमान किया जारहा है तो होना ही चाहीये.,आज इस दिवस को मनाने की प्रथा बंद ही हो तो अच्छा होगा!

    rajlaxmi333 के द्वारा
    September 6, 2012

    माननीय पिताम्बर सर , प्रणाम ! सर्वप्रथम मैं आपका दिल से शुक्रगुजार हूँ जो आपने मेरे लेख को पढ़ें । शिक्षक दिवस, आज मुझे अपमान दिवस इसलिए लगने लगा है क्योंकि आज शिक्षकों को इतना तोड़ दिया गया है कि उसकी गिनती खुद तोड़नेवाला नहीं बता सकते हैं । समान काम के लिए समान वेतन शिक्षकों का हक है किन्तु उसे एक कुशल मजदूर से भी कम मजदूरी दी जा रही क्या ये शिक्षकों का अपमान नहीं है ? एक शिक्षक को सारा आसमान दूसरे को एक कतरा नहीं क्या ये अपमान नहीं है ? इतिहास गवाह है राजनीति की यही ओछी हरकत पर गुलामी की दस्तक हुई थी और अब नियोजन की एक नई चलन ! आज शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने के बावजूद क्या मिलेगा ? एक मृत मानदेय ! हर पल हर घड़ी प्रत्येक वस्तु के मूल्य में वृद्धि हो रही है और यह मानदेय जस का तस पड़ा हुआ है । ऐसे में मान क्या और सम्मान क्या ?


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