Raj Kumar

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Raj


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बंधुआ मजदूर

Posted On: 8 Apr, 2017  
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धर्म

Posted On: 26 Jul, 2016  
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अंधा कानून

Posted On: 11 Dec, 2015  
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असहिष्णुता

Posted On: 3 Dec, 2015  
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स्वच्छ भारत

Posted On: 26 Nov, 2015  
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बदनाम गुरु जी !

Posted On: 18 Sep, 2015  
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ब्रह्मांड में बुद्धिजीवी

Posted On: 25 Jul, 2015  
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सरकारी खजाना वोट खरीदने के लिए होता है ।

Posted On: 20 Jul, 2015  
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द्रोणाचार्य के परीक्षा और परिणाम!

Posted On: 2 Jul, 2015  
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शिक्षा राशि का सच!

Posted On: 8 Mar, 2015  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

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माननीय पिताम्बर सर , प्रणाम ! सर्वप्रथम मैं आपका दिल से शुक्रगुजार हूँ जो आपने मेरे लेख को पढ़ें । शिक्षक दिवस, आज मुझे अपमान दिवस इसलिए लगने लगा है क्योंकि आज शिक्षकों को इतना तोड़ दिया गया है कि उसकी गिनती खुद तोड़नेवाला नहीं बता सकते हैं । समान काम के लिए समान वेतन शिक्षकों का हक है किन्तु उसे एक कुशल मजदूर से भी कम मजदूरी दी जा रही क्या ये शिक्षकों का अपमान नहीं है ? एक शिक्षक को सारा आसमान दूसरे को एक कतरा नहीं क्या ये अपमान नहीं है ? इतिहास गवाह है राजनीति की यही ओछी हरकत पर गुलामी की दस्तक हुई थी और अब नियोजन की एक नई चलन ! आज शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने के बावजूद क्या मिलेगा ? एक मृत मानदेय ! हर पल हर घड़ी प्रत्येक वस्तु के मूल्य में वृद्धि हो रही है और यह मानदेय जस का तस पड़ा हुआ है । ऐसे में मान क्या और सम्मान क्या ?

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